देहरादून के रचनाकारों ने जयंती पर डॉ गिरिजा शंकर त्रिवेदी के गीतों को किया प्रस्तुत…..

देहरादून।नवोदित प्रवाह एवं हिमालय विरासत ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में 11 मई 2026 को प्रीतम रोड स्थित रचना संसार सभागार में कवि डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी की जयंती के अवसर कलाकारों ने डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी द्वारा रचित गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दी गई ।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन थे जबकि अध्यक्षता देश के , सुप्रसिद्ध वरिष्ठ गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की
और समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ कमला पंत ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया । इस अवसर पर प्रसिद्ध रचनाकारों और गायकों द्वारा डॉ गिरिजा शंकर त्रिवेदी के विभिन्न लोकप्रिय गीतों को अपनी शैली में प्रस्तुत किया गया । प्रस्तुत किए गए गीतों एवं गायकों का विवरण इस प्रकार है ।
. डॉ. सोनिया आनंद द्वारा प्रस्तुत गीत : ज्योति रथ बढ़ता चले, यह ज्योतिरथ बढ़ता चले ।
अंध दुर्गम घाटियों को,
वधिर युग परिपाटियों को,
पाटकर चौरस सतह पर
अथक अविरत आत्मनिर्भर ।
लिली भट्ट ढौंडियाल द्वारा प्रस्तुत गीत :
कविता अपने पर होती है, अपनेपन का कुछ अंत नहीं,
अपना पतझर भी होता है, अपना है सिर्फ बसंत नहीं।
.डॉ. क्षमा कौशिक द्वारा प्रस्तुत गीत:
‘ शिखरों को चूमती
घाटियों में झूमती,
बिखरी है चांदनी ‘ 4.अजय जोशी जी द्वारा प्रस्तुत गीत :
पर डोली जब जब पुरवाई नीरवता डूबी क्रंदन में ।
ऐसी आई याद तुम्हारी, भर भर आया नीर नयन में।
.अरुण भट्ट जी द्वारा प्रस्तुत गीत :
तुम सिर्फ उठा लो साज आज,
मै मन का गीत सुना दूंगा ।
मणि अग्रवाल ‘ मणिका ‘ जी द्वारा प्रस्तुत गीत:
बुनी है जीवन की जो कहानी,
न मै भुलाऊं न तुम भुलाना .कुलबीर चन्नी जी द्वारा प्रस्तुत गीत:
जितना सुख है मधुर मिलन में,
उतना ज्यादा दुख बिछुड़ने में । इंगिता पुजारी जी द्वारा प्रस्तुत गीत:
सांझ है बहार की, सुबह जहां खुमार की,
मै आ गया हूं उस डगर, मै आ गया हूं उस नगर । 9. अंजू पांडेय जी द्वारा प्रस्तुत गीत :
री अलबेली, सोन चमेली, भर दे दूध कटोरा,
कागा छत पै मचाए शोर, कोई घर आने वाला है ।
.श्रद्धा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत गीत:
पूरब के मधुवन की
मालिन रवि रश्मि चली !
रेशम तन, सौरभ मन, ज्योति वसन, हेम वरन
पैरों में कलरव के पायल छुम छुम छनन
. उर्मिला शर्मा द्वारा प्रस्तुत गीत :
‘ एक गीत प्यार का आओ गुन गुना तो ले ।
कब तक हंसे बहार , कब तलक फले फसल ।
.कविता बिष्ट ‘ नेह ‘ द्वारा प्रस्तुत गीत :
रंग बहका ले नयन भले ही पल दो पल तक
किंतु गंध के बिना नहीं राम सकता है मन !
.डॉ. लक्ष्मी भट्ट द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण गीत :
‘ धरती तन है, पवन प्राण है, पानी है जीवन हु
पावनकारी पावक हलचल, रक्षक नील गगन ।
और डॉ .भारती मिश्रा द्वारा प्रस्तुत गीत :
चांद तारों सजी असमां की गली,
मोड़ अपना बदलती रही रात भर ।
धन्यवाद वरिष्ठ पत्रकार भूपत सिंह बिष्ट ने व्यक्त किया