वेद मंत्रों की मंगल ध्वनि एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ उत्तराखंड विद्वत सभा का सत्रहवाँ वार्षिक उत्सव..
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3 September 2026
Shikhar Sandesh

देहरादून। उत्तराखंड विद्वत सभा का सत्रहवाँ वार्षिक उत्सव बुधवार को गीता भवन, राजा रोड स्थित सत्संग हॉल में विधि-विधान, वेद मंत्रों की मंगल ध्वनि एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्वलन एवं दीप उत्सव के साथ हुआ। इसके पश्चात सभा की ओर से विधिवत हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उमेश शर्मा काऊ जी, विधायक रायपुर विधानसभा क्षेत्र, विशिष्ट अतिथि ज्योतिष पीठ व्यास पद से अलंकृत एवं सभा के संरक्षक पूर्व राज्यमंत्री आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी तथा मुख्य वक्ता पूर्व राज्यमंत्री आचार्य सुभाष जोशी जी रहे। कार्यक्रम में सभा के संरक्षक राम लखन गैरोला जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। साथ ही महंत श्री 108 कृष्णागिरी जी महाराज का भी सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उमेश शर्मा काऊ जी ने उत्तराखंड विद्वत सभा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विद्वत समाज को एकजुट होकर समाज एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर उत्तराखंड विद्वत सभा के लिए भवन निर्माण का भी उद्घोष किया और कहा कि शीघ्र ही विद्वत सभा के भवन निर्माण की दिशा में कार्य किया जाएगा।
मुख्य वक्ता पूर्व राज्यमंत्री आचार्य सुभाष जोशी जी ने कहा कि विद्वत सभा को अपने निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप ही कार्य करना चाहिए। व्यक्तिगत अथवा निजी भावनाओं से ऊपर उठकर सभी विद्वानों को एकजुट होकर सभा को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती तभी संभव है, जब सभी लोग आपसी मतभेदों को छोड़कर सभा के उद्देश्यों और सनातन धर्म एवं संस्कृति के हित में मिलकर कार्य करें।
धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण में विद्वत सभा की महत्वपूर्ण भूमिका
विशिष्ट अतिथि आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने कहा कि समाज में एकता एवं अखंडता बनाए रखने तथा धार्मिक, नैतिक एवं उच्च जीवन मूल्यों की वृद्धि में विद्वत सभा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विद्वत सभा वर्षों से इस दिशा में कार्य कर रही है और भविष्य में भी निरंतर समाज के मार्गदर्शन एवं धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करती रहेगी। उन्होंने सभी विद्वतजनों से एकजुट होकर इस पवित्र उद्देश्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सभा के संरक्षक राम लखन गैरोला जी ने भी उपस्थित विद्वत समाज को एकता का संदेश देते हुए धर्म, संस्कृति एवं सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में संगम सांस्कृतिक मंच के कलाकारों द्वारा मनमोहक एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। विद्वत सभा के मंच पर धार्मिक एवं वैदिक वातावरण के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। उपस्थित अतिथियों एवं विद्वत समाज ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य हर्षपति गोदियाल जी, अध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा ने की। उन्होंने सभी अतिथियों, संरक्षकों, विद्वानों, कलाकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्वत सभा का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं वैदिक परंपराओं को मजबूत करना है। उन्होंने सभी के सहयोग से सभा को और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर आचार्य सत्य प्रसाद सेमवाल जी, आचार्य विपिन चंद्र डोभाल जी, आचार्य राजेश अमोली जी, आचार्य आदित्य राम थपलियाल जी, आचार्य मुरली मनोहर सेमवाल जी, आचार्य दीपक अमोली जी, आचार्य आशीष खंगराल जी, आचार्य हर्षपति गोदियाल जी, आचार्य विकास भट्ट जी, आचार्य अभिषेक ममगाईं जी, आचार्य नीरज गोदियाल जी, आचार्य मनमोहन लोहनी जी ,आचार्य विकास नौडियाल जी,कबेंद्र सेमवाल,,आचार्य राम चंद्र ममगाईं,आचार्य संदीप रतूड़ी जी, आचार्य बिजेंद्र प्रसाद ममगाईं जी, आचार्य उदयशंकर भट्ट जी, आचार्य जयदेव सुंदरियाल जी, , आचार्य दिनेश भट्ट जी, आचार्य मुकेश पंत जी आचार्य गणेश जोशी जी आचार्य मंत्री थपलियाल जी उत्तराखंड आचार्य भरत राम तिवारी जीपं0मदन मोहन मैठाणी जी आचार्य Umakant Bhatt जी आचार्य संदीप बडोनी जी सहित अनेक विद्वान, संत-महात्मा एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समूचा कार्यक्रम वैदिक परंपरा, धर्म-संस्कृति, सामाजिक एकता एवं विद्वत समाज की एकजुटता के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।