हौसलों से बनी है राह अपनी, थोड़ी मंजिल अभी बाकि है…..

देहरादून।  जिस ख्वाब को पूरा करने में तमाम उम्र जूझते रहे हम, वो इबारत अभी बाकि है…

छोड़ेंगे ना दामन उसका संघर्ष कितना भी लम्बा हो मगर, उम्मीद अभी बाकि है…

हम वो मुसाफिर नहीं जो हवाओं के एक झोंके से रुख अपना बदल देते है…हौसलों से बनी है राह अपनी, थोड़ी मंजिल अभी बाकि है…..

ये मन के उदगार विवेकानंद खंडूरी के हैं जिन्होंने एच.एन.बी.  को देश के शीर्ष महाविद्यालय की श्रृंखला में स्थापित होते देखा है। आज शिक्षा के आधुनिक दौर में बड़े महाविद्यालय भी अपने अस्तित्व को बरकरार रख पाने में प्रतिस्पर्धाओं के दौर से गुजर रहे है। उनका प्रयास है की सरकार एक बार फिर प्रदेश के महाविद्यालय को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के रूप में उभरते मेधावी बच्चों को उनके सपने साकार करने हेतु विद्यालयों को मजबूती प्रदान करें।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए चले आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले विवेकानंद खंडूरी शिक्षा से जुड़े विषयों पर लगातार अपनी बात रखते रहे हैं। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण आवश्यक है। उत्तराखंड के महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री एडवोकेट विवेकानंद खंडूरी ने आवाज बुलंद की है। कॉलेजों में शिक्षकों के अभाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता के बीच उन्होंने इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार का ध्यान उच्च शिक्षा की चुनौतियों की ओर आकर्षित किया है।

शिक्षकों की कमी से उच्च शिक्षा प्रभावित होने की चिंता
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती हैं। शिक्षकों की कमी का असर नियमित कक्षाओं, पाठ्यक्रम पूरा करने और विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में रिक्त पदों को भरने और महाविद्यालयों की व्यवस्था मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है
सरकार से समाधान की उम्मीद
विवेकानंद खंडूरी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक विमर्श में लाकर शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है। अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए शासन स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
उच्च शिक्षा की मजबूती प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए शिक्षकों की कमी दूर करना और महाविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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