4 November 2026

जागर संरक्षण दिवस पर लोक जागर और ढोल-दमाऊ की थाप से गूंजायमान हुई द्रोणनगरी

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जागर संरक्षण दिवस पर 17 पारंगत कलावंतों को मिला ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान-2026’, उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 5 वरिष्ठ अधिकारियों को ‘डांडी-कांठी रत्न-2026’ से किया सम्मानित

देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोक जागरों एवं लोक वाद्ययंत्रों के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से डांडी-कांठी क्लब परिवार द्वारा आयोजित जागर संरक्षण दिवस कार्यक्रम संस्कृति विभाग, देहरादून के प्रेक्षागृह में धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड की पारंपरिक लोक परंपरा दयूल-पाथा में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों से पहुंचे पारंपरिक जागरियों एवं ढोल वादकों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। जैसे ही मंच पर पारंपरिक जागर और ढोल-दमाऊ की थाप गूंजी, पूरा प्रेक्षागृह उत्तराखंड की लोक संस्कृति की जीवंत झलक से सराबोर हो उठा। दर्शक दीर्घा में मौजूद आम जनमानस के साथ गीत-संगीत जगत, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, फिल्म एवं पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में लोकगायक गायक विवेक नौटियाल, धनराज शौर्य और सपना, अनिशा रांगड़, संगीता राज, सनी दयाल, सीमा पंगरियाल, संतोष खेतवाल सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं।

जागर संरक्षण दिवस का महत्व
उत्तराखंड की लोक संस्कृति में जागर का विशेष महत्व है। जागर का अर्थ ‘जगाना’ होता है। पर्वतीय समाज में जागर केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पर्वतीय गांवों में पारंपरिक जागरियों द्वारा गोरिल देवता, नरसिंह देवता, नागदेवता सहित विभिन्न लोक देवी-देवताओं का आवाहन जागर गायन के माध्यम से किया जाता रहा है। बदलते दौर में यह परंपरा धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है। ऐसे में जागरियों, ढोल-वादकों तथा पारंपरिक लोक विधाओं से जुड़े कलाकारों को सम्मानित कर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इन्हें मिला ‘डांडी-कांठी रत्न-2026’ सम्मान
1. श्री मनमोहन जैन — अपर सचिव एवं राज्य बजट अधिकारी, उत्तराखंड सरकार
2. श्री सत्येंद्र कुमार गुप्ता जी — सचिव प्रशासन (प्रभारी), उत्तराखंड जल संस्थान
3. श्री युगल किशोर पंत जी (IAS) — सचिव, संस्कृति, सैनिक कल्याण एवं सचिवालय प्रशासन, उत्तराखंड
4. श्रीमती अनुराधा पाल जी (IAS) — प्रशासनिक सेवा एवं आबकारी तथा ग्राम्य विकास क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
5. श्री दिनेश कुमार जी — निदेशक, कृषि विभाग, उत्तराखंड
कुल 5 वरिष्ठ अधिकारियों को ‘डांडी-कांठी रत्न-2026’ से सम्मानित किया गया।

इन्हें मिला ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान-2026
1. प्रो. डॉ. डी.आर. पुरोहित जी — लोकसंस्कृति, लोकनाट्य एवं लोकसंगीत के विद्वान
2. श्री रमेश बगियाल जी — वरिष्ठ लोकगायक
3. श्री नागेन्द्र प्रसाद जी — DOP, छायांकन एवं संपादन विशेषज्ञ
4. श्रीमती रामेश्वरी भट्ट जी — गढ़वाली लोकगायिका
5. श्री बलराज नेगी जी — अभिनेता, ‘घरजवैं’, ‘जिया की लाड़ी’ आदि फिल्मों से जुड़े
6. डॉ. जयेंद्र सिंह पंवार जी — पौराणिक रामलीला के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान
7. श्री रामचरण जुयाल जी — हुड़का एवं मोछंग के प्रसिद्ध लोक वाद्य वादक
8. श्री दान सिंह फर्त्याल जी एवं श्रीमती पुष्पा फर्त्याल जी — लोक जागर गायन तथा हुड़का एवं थाली वादन
9. श्री निहाल शाह जी — पारंपरिक लोक जागरी
10. श्री जमन दास जी — ढोल वादक
11. श्री नत्थी लाल जी — मसकबीन वादक
12. श्री दिनेश लाल जी — काष्ठ शिल्प विशेषज्ञ
13. श्री प्यारे लाल मैठाणी जी — पारंपरिक भोज विशेषज्ञ एवं सरोला रसोइया
14. श्री गजेन्द्र कुमार जी — पारंपरिक लोक जागरी
15. श्री बचन दास जी — उत्कृष्ट ढोल वादन
16. श्री ओम प्रकाश मैठाणी जी — पारंपरिक भोज विशेषज्ञ, रसोइया एवं सरोला
17. श्रीमती किरण सिंह जी — फिल्म निर्मात्री एवं अभिनेत्री

इस अवसर पर विलुप्त होती जा रही सरोला रसोई परंपरा से जुड़े लोगों को भी सम्मानित किया गया। पारंपरिक रूप से पंगत में विधि-विधान के साथ भोजन कराने तथा चूल्हे पर लकड़ी से भोजन तैयार करने वाली यह परंपरा उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है।
*हर वर्ष आयोजित होता है जागर संरक्षण दिवस*
डांडी-कांठी क्लब परिवार द्वारा प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को जागर संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाता है। क्लब के अध्यक्ष विजय भूषण उनियाल ने कहा कि गांवों में विलुप्त होती जा रही लोक जागर परंपरा को जीवित रखने वाले जागरियों, ढोल-वादकों तथा अन्य पारंपरिक विधाओं से जुड़े लोगों का सम्मान करना क्लब की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जागर और ढोल-दमाऊ उत्तराखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज और नई पीढ़ी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि डांडी-कांठी क्लब द्वारा लोक संस्कृति की विभिन्न विलुप्तप्राय परंपराओं से जुड़े पारंगत लोगों को सम्मानित करने का क्रम आगे भी जारी रहेगा।

ये अतिथि रहे मौजूद…..

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लोकगायक गढरत्न नरेंद्र सिंह नेगी सहित लोकगायिका मीना राणा, सौरभ मैठाणी, पूर्व दायित्वधारी रविंद्र जुगरान, अभिषेक साहू, रेखा धस्माना, संजय कुमोल, नरेंद्र रौथाण, प्रदीप भंडारी, पदम गुसाईं, कांता प्रसाद, वीरेंद्र डंगवाल, अमित बी कपूर और गीत-संगीत, कला, संस्कृति, सामाजिक एवं पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ये रहे मौजूद

डांडी-कांठी क्लब के अध्यक्ष विजय भूषण उनियाल, सचिव कृष्णा नंद भट, पूर्व पार्षद नरेश रावत, प्रीतम सिंह रावत, निदेशक डीबीएसएस मुकेश भट्ट, नत्थी लाल डोरियाल, अंबिका प्रसाद सेमवाल, प्रमोद नौटियाल, चंद्र दत्त सुयाल और मंच संचालक सुनील सजवाण सहित क्लब परिवार के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे।

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