आवासीय क्षेत्र के लिए मुसीबत बनी बहु मंजिला ईमारत ! सवालों के घेरे में एमडीडीए……
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देहरादून की नैस्विला रोड, जिसे चौधरी बिहारी लाल रोड भी कहा जाता है, की एक आवासीय कॉलोनी में सिर्फ 8 मीटर की सड़क पर 64 फ्लोर की बहुमंजिली इमारत आखिर किस नियम और किस आधार पर खड़ी कर दी गई?
इस जमीन के 1953 से लेकर आज तक के राजस्व अभिलेख, 1960 का नक्शा, रास्ते की भूमि, खेवट/सरकारी भूमि और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल में गंभीर सवाल सामने आए हैं।
विशेष रूप से, यदि 1960 के पंजीकृत दस्तावेज में वर्णित 5 बिस्वा Common Passage का स्वरूप वर्तमान Group Housing Project के लिए परिवर्तित या विस्तारित किया गया है, अथवा 1975 में दर्ज 24 फीट Municipal Road को बिना विधिवत अभिलेखीय आधार के 9.00 मीटर माना गया है, तो इन तथ्यों का स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित सत्यापन किए बिना निर्माण को आगे बढ़ने देना गंभीर प्रशासनिक प्रश्न उत्पन्न करता है।
इसके अतिरिक्त, इमारत के पीछे लगभग आधा बीघा सरकारी भूमि होने की बात सामने आई है। आरोप है कि पीछे मौजूद एक ढांग को भरकर वहां पुस्ता लगाया गया और उस भूमि पर अतिक्रमण किया गया। यह पुस्ता कभी भी गिर सकता है, जिससे उसके पीछे बने तीन मकानों में रहने वाले लोगों की जान-माल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस पूरे मामले में सरकारी भूमि की स्थिति, ढांग को भरने, पुस्ते के निर्माण और संभावित भू-धंसाव की स्वतंत्र तकनीकी जांच अत्यंत आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल—जिस बिल्डिंग को एक साल तक बंद रखा गया, वही बाद में किस प्रक्रिया के तहत फिर चालू हो गई?
इस पूरी प्रक्रिया में एमडीडीए के एई, जेई, अधिशासी अभियंता और उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी जी के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो एक साल तक भवन बंद क्यों रहा? और यदि अनियमितताएं थीं तो उन्हें दूर किए बिना वैधता कैसे मिली?
क्या राजस्व विभाग से जमीन की वास्तविक स्थिति, Common Passage और Municipal Road की चौड़ाई की स्वतंत्र जांच कराई गई?
क्या पीछे स्थित लगभग आधा बीघा सरकारी भूमि, ढांक को भरने और पुस्ता निर्माण से संबंधित तथ्यों की जांच कराई गई?
क्या पुस्ते की स्थिरता और उसके पीछे बने तीन मकानों की सुरक्षा का तकनीकी आकलन हुआ है?
क्या पर्यावरण, वन, जल संस्थान, विद्युत और अन्य संबंधित विभागों की आवश्यक एनओसी वास्तव में मौजूद हैं?
8 मीटर की सड़क पर इतनी बड़ी इमारत को अनुमति देने से पहले यातायात, अग्नि-सुरक्षा, पानी और सीवर की क्षमता का आकलन हुआ या नहीं?
Elevate Construction Company और संजय निजावन से जुड़ी भूमि खरीद तथा निर्माण गतिविधियों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
यह केवल एक बिल्डिंग का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या देहरादून में नियम आम आदमी के लिए अलग और बड़े बिल्डरों के लिए अलग हैं?
सील करो, फिर कंपाउंडिंग करो और कागजों में सब ठीक कर दो—अगर यही विकास की नीति है तो देहरादून का भविष्य भगवान भरोसे है।
इस मामले में राज्य आंदोलनकारियों द्वारा श्री रवींद्र जुगरान जी के सान्निध्य और अध्यक्षता में, नैस्विला रोड के निवासियों, डॉ. दीपक जोशी, श्री रवींद्र सिंह गुसाई, श्री सुल्तान सिंह रावत तथा क्षेत्र के अन्य निवासियों द्वारा गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के समक्ष शिकायत की जा चुकी है। इस मामले को उठाने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने में नैस्विला रोड के निवासियों तथा शिकायतकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आयुक्त महोदय से अनुरोध किया गया है और 15 दिन की समय-सीमा दी गई है। यदि इस समय-सीमा के भीतर सीलिंग और कंपाउंडिंग से संबंधित कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो हमें माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।
अब जनता देख रही है कि जांच निष्पक्ष होती है या फाइलों में दब जाती है।