भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में क्यों हुआ ?
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देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति-भाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लिया और उनके दिव्य स्वरूप का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर मुख्य पुजारी आचार्य दामोदर सेमवाल जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके जन्म के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म उस समय हुआ, जब अधर्म, अत्याचार और अन्याय अपने चरम पर था। कारागार में जन्म लेकर उन्होंने यह संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, सत्य और धर्म की अंततः विजय होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हमें केवल उपदेश ही नहीं देते, बल्कि अपने जीवन के माध्यम से कर्म, कर्तव्य, साहस, प्रेम और धर्म का मार्ग दिखाते हैं। श्रीकृष्ण का संदेश है कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का ईमानदारी और निष्ठा से पालन करना चाहिए।
आज के समय में श्रीकृष्ण का यह संदेश और भी प्रासंगिक है कि अन्याय के सामने मौन न रहें, सत्य का साथ दें और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा मानवता की भावना को मजबूत करें। विशेस आकर्षण झांकी साथ में आचार्य सन्दीप बहुगुणा आचार्य दिवाकर भट्ट जी के भजनों पर लोग खूब झूमें वहीं आशीष सेमवाल शुभम सेमवाल आयुष ममगांई यश बछेती पारितोष चमोली नवीन चमोली अनिता चमोली धीरेन्द्र असवाल विरेन्द्र असवाल सन्तोष गैरोला लक्ष्मी बहुगुणा मीना सेमवाल सरस्वती रतूडी आदि सम्मलित थे।