मन की स्वच्छता एवं धरती की हरियाली”कार्यक्रम के जरिये किया जागरूक….

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देहरादून। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पृथ्वी दिवस के पावन अवसर पर “मन की स्वच्छता एवं धरती की हरियाली”विषय पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम आज रविवार को अत्यंत उत्साह और उमंग के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को आंतरिक स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान एवं विशिष्ट अतिथि प्रकाश चन्द्र अंथवाल वन दरोगा साथ ब्रह्म कुमारी आरती एवं ब्रह्म कुमारी निर्मला द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे वातावरण में सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र प्रभारी बीoकेo आरती ने अपने उद्बोधन में मन की स्वच्छता और धरती की हरियाली के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य का मन शुद्ध एवं सकारात्मक नहीं होगा, तब तक वह प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह नहीं निभा सकता, कहा कि हमारे नकारात्मक संकल्प प्रकृति के पाँचों तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—पर प्रभाव डालते हैं। इसलिए सकारात्मक सोच और शुद्ध संकल्पों के माध्यम से ही हम प्रकृति के संतुलन को बनाए रख सकते हैं, बताया कि संस्था के मुख्यालय माउंट आबू में संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की आधुनिक एवं प्रभावी व्यवस्थाएं अपनाई जा रही हैं, जो समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

पर्यावरण सचेतक जुगलान ने ब्रह्माकुमारी बहनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि श्वेत वस्त्र पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हमारे तिरंगे में भी सफेद पट्टी शांति और पवित्रता का प्रतिबिंब है। उन्होंने आगे कहा कि ईश्वर ने प्रत्येक जीव के लिए उसके अनुरूप भोजन की व्यवस्था की है, किंतु आज मनुष्य अपनी प्रकृति से भटककर मांसाहार की ओर बढ़ रहा है, जो पर्यावरण और मानवता दोनों के लिए चिंतनीय है।

वन दरोगा श्री अंथवाल जी ने बताया कि पृथ्वी दिवस वर्ष 1970 से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्तिगत वाहनों के बढ़ते उपयोग से पृथ्वी पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान हेतु नए मार्ग बनाए जाते हैं, परंतु इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है, जिसका जलवायु पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया।

सह-संचालिका बीoकेo निर्मला बहन ने अपनी हृदयस्पर्शी कविता के माध्यम से प्रकृति की पीड़ा को व्यक्त किया—
“धर्ती कह रही बार-बार, सुन लो मनुष्यों मेरी पुकार,
बड़े-बड़े महलों को बनाकर मत डालो मुझ पर भार।
पेड़-पौधों को नष्ट करके मत उजाड़ो मेरा संसार।”
एक सुंदर नाटिका के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार बीoकेo बहनों के योग के शक्तिशाली वाइब्रेशन द्वारा प्रकृति के पाँचों तत्वों को ऊर्जा मिल रही है और वे संतुलन व शांति की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों को पर्यावरण संरक्षण, जल बचत एवं स्वच्छता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।
तत्पश्चात ब्रह्मा भोजन का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर ढाई सौ से अधिक गणमान्य नागरिक, ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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