कृत्रिम बुद्धिमत्ता : मानव की सहायक या भविष्य के गले की फांस….?

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(एक विश्लेषणात्मक अध्ययन — संजय राणा)

दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशल इंटेलीजेंस विषय पर वैश्विक सम्मेलन जारी है, जिसमें विश्व के अनेक देशों से ए आई पर कार्य करने वाले संगठन भागीदारी कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि मानव ने जब – जब अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने की ओर कदम बढ़ाया है, तब – तब विज्ञान का मानवीय जीवन में दखल बढ़ा है। यह दखल शुभ भी हो सकता है और अशुभ भी, हालांकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। तकनीक के सही उपयोग के लिए आवश्यक है कि उपयोग करने वाला समाज मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। वर्तमान समय में अनेक घटनाएं ऐसी घटित हो रही हैं जो जीवन को प्रभावित कर रही हैं, जैसे लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लाखों – करोड़ों रुपयों की ठगी। ए आई के माध्यम से बने अश्लील चित्रों द्वारा व्यक्ति / महिलाओं का चरित्र हनन। इसका ताजा उदाहरण है एक केंद्रीय मंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री पर लगाएं गए आरोप।
ए आई के माध्यम से फेक न्यूज बना कर फैलाना, वर्तमान समय में वॉट्सएप यूनिवर्सिटी पर तैरती सूचनाएं बड़ी संख्या में झूठी होना आदि – आदि चिंता का विषय बना हुआ है। आज हम मानवीय जीवन में ए आई के बढ़ते दखल के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर अध्ययन करने का प्रयास करेंगे। साथ ही इसका निर्णय आप सब पर ही छोड़ेंगे कि भविष्य का समाज कैसा होगा?

ए आई 21 वीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, उद्योग और संचार सहित अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। आज का मंथन ए आई के द्वैत स्वरूप का विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास करेगा। दरअसल
ए आई जहां एक ओर मानव जीवन को सरल, प्रभावी और उत्पादक बनाती है, तो दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से सामाजिक, नैतिक और कानूनी संकट उत्पन्न हो सकते हैं। विशेष रूप से डीपफेक, फर्जी डिजिटल सामग्री, रोजगार संकट और गोपनीयता उल्लंघन जैसे मुद्दे भविष्य के लिए चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इसको नकारा नहीं जा सकता। यह मंथन ए आई के लाभों और जोखिमों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए संतुलित नियमन, नैतिक मानकों और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता पर बल देने का प्रयास करेगा।

इसमें दो राय नहीं है कि मानव इतिहास में तकनीकी क्रांतियों ने सामाजिक संरचनाओं और जीवन शैली को गहराई तक प्रभावित किया है। हरित क्रांति, औद्योगिक क्रांति और सूचना क्रांति के बाद अब ए आई आधारित तकनीकी क्रांति विश्व व्यवस्था को पुनर्परिभाषित कर रही है। ए आई केवल स्वचालन (Automation) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्लेषण, निर्णय-निर्माण, रचनात्मक उत्पादन और व्यवहार पूर्वानुमान जैसे जटिल कार्यों को भी संभव बना रही है। तथापि, यह तकनीक सामाजिक विश्वास, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है। इस मंथन का उद्देश्य ए आई के लाभों एवं संभावित दुष्प्रभावों का अकादमिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना है तथा भविष्य के लिए नीतिगत सुझाव भी प्रस्तुत करना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अवधारणा और कार्यप्रणाली

ए आई वह प्रणाली है जो कंप्यूटर को मानव-सदृश निर्णय लेने और सीखने की क्षमता प्रदान करती है। इसके प्रमुख घटक हैं:
*मशीन लर्निंग (Machine Learning),*डीप लर्निंग (Deep Learning),*नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और *कंप्यूटर विजन (Computer Vision)।
इन तकनीकों के माध्यम से ए आई विशाल डेटा का विश्लेषण कर पैटर्न पहचानती है और भविष्यवाणी करती है।

AI के सकारात्मक प्रभाव

(Positive Impacts of AI)

शिक्षा क्षेत्र…

ए आई आधारित प्लेटफॉर्म व्यक्तिगत शिक्षण मॉडल विकसित कर रहे हैं। अनुकूलनशील शिक्षण (Adaptive Learning) से छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सामग्री उपलब्ध हो रही है।

स्वास्थ्य सेवाएँ

रोगों की प्रारंभिक पहचान और चिकित्सा छवियों का विश्लेषण दवा अनुसंधान में तीव्रता ए आई ने निदान की सटीकता और उपचार की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार किया है।

प्रशासन एवं सुशासन….

डेटा-आधारित निर्णय, अपराध विश्लेषण, ट्रैफिक नियंत्रण और सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी में ए आई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आर्थिक उत्पादकता

उद्योगों में स्वचालन से उत्पादकता बढ़ी है, लागत कम हुई है और दक्षता में वृद्धि हुई है।

पर्यावरण प्रबंधन…..

ए आई जलवायु परिवर्तन विश्लेषण, वन प्रबंधन, जल संरक्षण और आपदा पूर्वानुमान में सहायक सिद्ध हो रही है।

ए आई के नकारात्मक प्रभाव और जोखिम (Risks and Challenges).

डीपफेक और फर्जी सामग्री….

ए आई द्वारा निर्मित नकली चित्र, वीडियो और ऑडियो सामाजिक विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। इससे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, राजनीतिक स्थिरता और न्याय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

रोजगार पर प्रभाव…

ऑटोमेशन से निम्न एवं मध्यम कौशल वाली नौकरियों पर संकट उत्पन्न हो सकता है। इससे आर्थिक असमानता बढ़ने की आशंका है।

डेटा गोपनीयता….

 

ए आई प्रणालियाँ विशाल मात्रा में व्यक्तिगत डेटा पर निर्भर करती हैं। यदि डेटा सुरक्षा कमजोर हो तो गोपनीयता का उल्लंघन संभव है।

नैतिक दुविधाएँ, निर्णय की जवाबदेही, एल्गोरिद्मिक पक्षपात (Algorithmic Bias)

मानव नियंत्रण की सीमा ये सभी ए आई के नैतिक उपयोग पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

नीतिगत सुझाव (Policy Recommendations)

सुदृढ़ कानूनी ढांचा –
डीपफेक और साइबर अपराध के विरुद्ध स्पष्ट और कड़े कानून बने।
मानवीय जीवन नैतिक मूल्यों पर आधारित है। ए आई द्वारा विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।
*डिजिटल साक्षरता – मानवीय जीवन में विज्ञान के हस्तक्षेप के बढ़ने के साथ- साथ नागरिकों को उसके प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

मानव-केन्द्रित दृष्टिकोण – अंतिम निर्णय स्वस्थ समाज का नियंत्रण मानव के हाथ में रहे।

डेटा संरक्षण कानून – व्यवस्थाओं को गोपनीयता सुनिश्चित करना होगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक शक्तिशाली तकनीक है जो मानव जीवन को नई दिशा दे सकती है।.साथ ही मानव के जीवन को नर्क भी बना सकती है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता तो रखती है, वहीं भारत जैसे देश में जहां *प्रत्येक बात पर राजनीति होती हो। *हर मुद्दे को वोटो की नजर से देखा जाता हो।
जहां कानून तो बने हैं, मगर उनको लागू करने वाली संस्थाओं में भ्रष्टाचार की दीमक लग चुकी हो।

जहां न्याय पाने के लिए पीढ़ी की पीढ़ियां खत्म हो जाती हों।
जहां एक ताकतवर या रसूखदार दोषी को बचाने के लिए सारी व्यवस्थाएं लग जाती हैं।

जहां कोई भी अपराध होने पर मीडिया ट्रायल ऐसे किया जाता हो जैसे सारे निर्णय आज ही ले लिए जाएंगे और उक्त मीडिया ट्रायल फेल होने के बाद पश्चाताप का एक शब्द भी न बोला जाता हो।
*जहां समाज को बोलने और लिखने की आजादी तो है मगर अपनी जिम्मेदारियों का अहसास न हो। उस स्थिति में वहां इसके अनियंत्रित या अनैतिक उपयोग से सामाजिक विश्वास, रोजगार और लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा हो सकता है। अतः ए आई का भविष्य उसके तकनीकी विकास पर नहीं, बल्कि मानवीय नैतिकता, नीति-निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी पर निर्भर करेगा। यदि संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो ए आई मानव की सहयोगी सिद्ध होगी; अन्यथा यह भविष्य की गले की फांस बन सकती है।

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