पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी ! मिलजुलकर प्रयास करने होंगे : जुगलान
ऋषिकेश श्यामपुर। पर्यावरण संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने राजकीय इण्टर कालेज खदरी खड़क माफ के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने को कभी भी कमतर न समझें। उन्होंने कहा कि विद्यालय मान्यता प्राप्त निजी संस्थान हों या सरकारी विद्यालय ये शिक्षा के मन्दिर हैं। इनमें पढ़ने वाले तपस्वी हैं और तपस्या के लिए ध्यान से ज्ञान प्राप्त होता है। शिक्षा संस्कार परक होनी चाहिए। उन्होंने कहा खदरी एक मात्र ऐसा गांव है जिसकी रचना स्वयं मां भगवती गंगाजी द्वारा खादर के निर्माण के साथ हुई है। यहाँ की मिट्टी न केवल अन्न उपजती है बल्कि मां भगवती गंगाजी के इस प्रथम उपजाऊ भूमि पर यहां पीसीएस और आई ए एस अधिकारी भी उपजते हैं। मेरा सौभाग्य है कि गांव से ग्लोबल तक की इस यात्रा में यहां के विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की सहभागिता भी रही है। उन्होंने कहा पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ पौधे लगाने से नहीं है बल्कि ऐसे छोटे छोटे प्रयासों और इको फ्रेंडली व्यवहार परिवर्तन से संबंधित है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए जन चेतना पैदा करता है। उन्होंने कहा पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है जिसके लिए हम सबको मिलजुलकर प्रयास करने होंगे। इनमें युवाओं और महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वह पर्यावरण संरक्षण जन चेतना संगोष्ठी के माध्यम से युवाओं को सम्बोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में वन्य जीव और मानव संघर्ष बढ़ा है इसके लिए हम मानव जिम्मेदार हैं।वनों के असंतुलित कटान और जंगलों में वन्यजीवों के प्राकृतिक सुवास में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वन्यजीव विचलित हो कर आबादी क्षेत्र में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे हैं।उन्होंने पलास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए थ्री आर (रिड्यूस रियुज और रिसाइकल) के सिद्धांत को अपनाने पर जोर दिया । इससे पूर्व पर्यावरण विद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान को संयुक्त राष्ट्र के जलवायु कार्यवाही सम्मेलन में क्लाइमेट एक्शन लीडरशिप अवॉर्ड 2025 से सम्मानित होने पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य आर एस पुंडीर एवं वन विभाग अधिकारी वन दरोगा अवतार सिंह रावत ने उत्तरीया अंग वस्त्र भेंटकर पुष्प माल्यार्पण से स्वागत किया। प्राचार्य आर एस पुंडीर ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के एक गांव से ग्लोबल तक की यात्रा में पर्यावरणविद विनोद जुगलान की कठिन मेहनत,अनवरत गंगा सेवा और प्रकृति के प्रति उनका निस्वार्थभाव का अटूट प्रेम है। संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिलने से हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।डॉ विनोद जुगलान ने विद्यार्थियों के मध्य अपनी संयुक्त राष्ट्र यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जीवन में अनुशासन सफलता की कुंजी है बिना अनुशासन के जीवन में सफलता मिलना कठिन होता है। उन्होंने कहा जीव और वन को मिलकर ही जीवन बना है इसलिए वन्य जीवों का सम्मान और वनों के संरक्षण पर जोर दिया।इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय परिवार और वन विभाग ऋषिकेश का आभार जताया।कार्यक्रम का संचालन शिक्षक डॉ ताजबर सिंह पड़ियार ने किया। मौके पर शिक्षक सुनील कुमार, वन बीट सहायक देवेन्द्र सिंह,अजय मलियाल,अजय पेंगवाल, अभिषेक रावत, मोहर सिंह भंडारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।