कलश यात्रा के साथ शुरू हुई शिवपुराण कथा…

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देहरादून। आज गढ़वाल सभा भवन नेशविला रोड़ में महिला कल्याण समिति के द्वारा आयोजित शिवपुराण कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली नेशविला रोड डंगवाल मार्ग से होते हुए पीत वस्त्र में शिर पर कलश रखी महिलाओं ने ऊँ नमः शिवाय हर हर भोले नम शिवाय भजन गाते हुए कथास्थल गढ़वाल सभा शिव मंदिर में ब्राह्मणों ने जलाभिषेक किया वहीं प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई जी ने कथावाचन करते हुए कहा भगवान शंकर जी को जलधारा पृय है लेकिन शिव जी को जल चढ़ानें से हमारे पांच तत्वों में जल तत्व पूर्त होता है ।
श्रावण मास में शिव पूजन करते समय यह भी चिन्तन करें कि भगवान के हाथ में त्रिशूल क्यों रखते हैं और इसका क्या सन्देश है। भगवान महादेव के हाथों में विराजमान त्रिशूल काम, क्रोध और लोभ तीन विकारों को नियंत्रित करने की सीख प्रदान करता है। “तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ” काम, क्रोध एवं लोभ रूपी मानव जीवन के महाशत्रुओं को पूरी तरह नष्ट तो कदापि नहीं किया जा सकता है, लेकिन नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है, इनको साधा अवश्य जा सकता है।
क्रोध तो भगवान महादेव भी करते हैं, लेकिन क्षण भर के लिए। कामदेव को भस्म करते समय क्रोधित हुए पर जब कामदेव की पत्नि रति आई तो उसे देखकर द्रवित हो गए। शक्ति का सही दिशा में प्रयोग ही पुण्य है तो गलत दिशा में प्रयोग ही पाप है। शिवजी ने अपनी ऊर्जा को नियंत्रित कर रखा है। काम, क्रोध एवं लोभ ये त्रिविकार जिसकी मुट्ठी में हैं, वही स्वयं के साथ-साथ जगत के लिए भी कल्याणकारी शिव रूप बन जाता है।
आज विशेस अध्यक्ष लक्ष्मी बहुगुणा उपाध्यक्ष सरस्वती रतुड़ी महासचिव सुजाता पाटनी नंदा तिवारी मंजू बडोनी चंदा बडोनी रजनी राणा सुशमा थपलियाल उषा भट्ट सुनिता बहुगुणा चम्पा थपलियाल रोशनी सकलानी शकुन्तला राणा महेश बहुगुणा यश बछेती
रितू बछेती आचार्य दामोदर सेमवाल आचार्य दिवाकर भट्ट आचार्य संदीप बहुगुणा आचार्य जितेंद्र धस्माना सुधाकर खंकरियाल आरव रतुड़ी दिपक उनियाल आदि उपस्थित थे ।

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