भक्ति मार्ग पर गुरु का ज्ञान अनिवार्य : भारती

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देहरादून । दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, देहरादून के आश्रम में एक दिव्य सत्संग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भजनों के मधुर गायन से हुआ, जिनकी व्याख्या साध्वी जाह्नवी भारती जी ने की। उन्होंने ही मंच संचालन भी संभाला। साध्वी जाह्नवी भारती ने शबरी प्रसंग से प्रारंभ करते हुए बताया कि शबरी ने भगवान श्रीराम से केवल उनकी भक्ति, प्रेम और आशीर्वाद ही माँगा। प्रभु ने उन्हें नवधा भक्ति का वरदान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार मनुष्य को भी परमात्मा से केवल परमात्मा को ही माँगना चाहिए, क्योंकि जब यह प्राप्त हो जाता है तो अन्य सभी वस्तुएँ स्वतः ही मिल जाती हैं। भक्ति मार्ग पर चलने के लिए गुरु का सही ज्ञान और मार्गदर्शन आवश्यक है, तभी जीव परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता साध्वी सुभाषा भारती ने कहा कि जब व्यक्ति सच्चे ज्ञान और दान से अपने जीवन को आगे बढ़ाता है, तो वह असीम पुण्य अर्जित करता है। ईश्वर सदा अपने भक्तों के भाव के अधीन होते हैं। उन्होंने ब्रह्मविद्या को सर्वोपरि विधा बताते हुए इसे समस्त विधाओं की ‘राजाविधा’ कहा और बताया कि यह ज्ञान पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ संत-सद्गुरु से ही प्राप्त होता है। इसे जान लेने के बाद फिर कुछ भी जानना शेष नहीं रह जाता। कार्यक्रम के समापन पर साध्वी अरूणिमा भारती ने कहा कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एक दिव्य नौका है, जिसके पवित्र मार्गदर्शन में चलकर हर साधक निश्चित रूप से जीवन के पार उतर सकता है। कार्यक्रम में वेदों का गायन भी हुआ और अंत में भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया।

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