गुरु वह शक्ति जो जीव को मोह-माया के अंधकार से निकालकर दिव्यता की ओर ले जाते : भारती

1 min read

देहरादून । दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, देहरादून के निरंजनपुर स्थित आश्रम में रविवार को आयोजित साप्ताहिक सत्संग प्रवचनों एवं भजन-संकीर्तन के विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली। पूरा वातावरण भक्तिभाव, साधना एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9ः00 बजे संस्थान के संगीतज्ञों द्वारा प्रस्तुत किए गए भक्तिमय, मनभावन एवं हृदयस्पर्शी भजनों से हुआ, जिनकी सुर लहरियों ने समूचे आश्रम परिसर को दिव्यता से भर दिया।
सत्संग की मुख्य वक्ता साध्वी विदुषी स्मिता भारती जी रहीं, जिन्होंने ब्रह्मज्ञान की महत्ता एवं सद्गुरु के वास्तविक स्वरूप पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “गुरु वह दर्पण हैं जिनमें जीव अपने वास्तविक आत्मिक स्वरूप का साक्षात्कार करता है। जब तक साधक केवल अपनी मन-बुद्धि की सीमित धाराओं में बहता है, वह संसार के भ्रमजाल में ही उलझा रहता है। परंतु जैसे ही वह गुरूमुख बनकर चलता है, यानी अपने संकल्पों, विचारों एवं कर्मों में गुरु की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन को केंद्र में रखता है, तभी उसके जीवन की दिशा और दशा दोनों रूपांतरित होने लगती हैं।“ उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि संसार में असंख्य आत्माएं जन्म लेती हैं, अपने कर्मों के अनुसार विविध गति प्राप्त करती हैं, परंतु वे आत्माएं वास्तव में सौभाग्यशाली होती हैं जिन्हें ईश्वर स्वयं किसी पूर्ण गुरु की शरण में ले जाकर ब्रह्मज्ञान की दीक्षा दिलवाते हैं। यह ज्ञान केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं होता, अपितु आत्मा के स्तर पर अनुभवित होने वाला ऐसा दिव्य विज्ञान होता है, जिससे साधक अपने भीतर व्याप्त अज्ञान, द्वंद्व एवं विकारों से ऊपर उठता है और परमात्मा के साथ साक्षात अनुभव में जुड़ जाता है।
साध्वी जी ने गुरु के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि “गुरु केवल एक उपदेशक या वक्ता नहीं होते, वे चेतना के वैज्ञानिक होते हैं। वे आत्मा के रोगों का निवारण करते हैं, चेतना को पुनः जाग्रत करते हैं और साधक को उसके परम लक्ष्य दृ ईश्वर से एकत्व की ओर अग्रसर करते हैं।“ उन्होंने यह भी बताया कि ब्रह्मज्ञान ही वह वास्तविक आध्यात्मिक साधना है जिसे वैदिक काल में समस्त ऋषियों ने अपने जीवन में धारण किया, और उसी ज्ञान के बल पर उन्होंने समाज को दिशा दी, शांति दी और धर्म की नींव को मजबूत किया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने न केवल भजन-संकीर्तन के माध्यम से आत्मिक आनंद प्राप्त किया, अपितु प्रवचनों से जीवन के वास्तविक उद्देश्य और उसकी ओर जाने के उपायों की स्पष्ट झलक भी पाई। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को गुरुप्रसाद वितरित किया गया एवं आगामी सप्ताह में दिव्य जीवन की साधना को निरंतर रखने का संकल्प भी लिया गया।

Copyright, Shikher Sandesh 2023 (Designed & Develope by Manish Naithani 9084358715) © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.