बहुमंजिला ईमारत को सील किये जाने कि मांग……….
1 min read
Oplus_16908288
देहरादून। नैशविला रोड ,डोभालवाला सेक्टर-8, देहरादून स्थित निर्माणाधीन Elevate Infracom की लगभग 64 फ्लैटों वाली बन रही बहुमंजिला ईमारत में व्याप्त अनियमितओ को लेकर नेशविला रोड़ की क्षेत्रीय जनता ने भारी रोष प्रकट करते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष वंशीधर तिवारी को ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन में क्षेत्रीय जनता ने अवगत कराया कि डोभालवाला, नैशविला रोड, सेक्टर-8, देहरादून की लगभग 150–200 वर्ष पुरानी आवासीय कॉलोनी में Elevate Infracom द्वारा भू-स्वामी श्री संजय नीझावन के नाम से लगभग 64 फ्लैटों वाली बहुमंजिला (लगभग 8 मंजिल) आवासीय परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है।
उक्त क्षेत्र मुख्यतः कम घनत्व वाला पुराना आवासीय क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश भवन एक अथवा दो मंजिल तक ही निर्मित हैं। स्थानीय मार्ग की चौड़ाई लगभग 20–22 फुट (लगभग 8 मीटर) है तथा भवन के आसपास अनेक स्थानों पर सड़क इससे भी संकरी है। ऐसी स्थिति में इतनी बड़ी बहुमंजिला परियोजना से स्थानीय निवासियों में जनसुरक्षा, यातायात, पर्यावरण एवं आधारभूत सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्याप्त है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा पूर्व में भी इस निर्माण के संबंध में शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं, जिसके उपरांत कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोका गया था, किंतु वर्तमान में पुनः निर्माण कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों की प्रमुख आपत्तियाँ निम्नलिखित हैं—
1-परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र में यातायात का अत्यधिक दबाव बढ़ेगा तथा वर्तमान सड़कें इतनी बड़ी आबादी एवं वाहनों का भार वहन करने के लिए पर्याप्त प्रतीत नहीं होती हैं।
2-लगभग 64 फ्लैटों के कारण जलापूर्ति, सीवर व्यवस्था, पार्किंग, विद्युत आपूर्ति तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।
3-परियोजना के पीछे स्थित रिटेनिंग वॉल (पुस्ता) एवं ढलान की स्थिरता को लेकर गंभीर आशंका है, जिससे विशेषकर वर्षाकाल में दुर्घटना एवं जनहानि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
4-परियोजना से क्षेत्र के पर्यावरण, वायु संचार, हरित क्षेत्र तथा पुराने आवासीय स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
5-स्थानीय निवासियों के अनुसार परियोजना के संबंध में विभिन्न विभागों से प्राप्त आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों एवं अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOCs) की वैधता एवं पूर्णता के संबंध में गंभीर संदेह है।
6-परियोजना के अग्निशमन सुरक्षा संबंधी स्वीकृत मानचित्र, फायर सेफ्टी प्रावधानों, निरीक्षण रिपोर्ट, परीक्षण आख्या तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई टिप्पणियों एवं अनुमोदनों की भी विस्तृत जांच कराई जाना आवश्यक है।
7- यह परीक्षण कराया जाए कि उक्त परियोजना को उत्तराखण्ड भवन उपविधि, 2021, राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC-2016), अग्नि एवं जीवन सुरक्षा (Fire & Life Safety) से संबंधित प्रावधानों तथा बहुमंजिला भवनों पर लागू एमडीडीए के समस्त नियमों एवं मानकों के अनुरूप स्वीकृति प्रदान की गई है या नहीं।
8-. यह जांच कराई जाए कि परियोजना के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत भवन मानचित्र, पार्किंग व्यवस्था, सेटबैक, भवन की ऊँचाई, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), ग्राउंड कवरेज, प्रवेश एवं निकास मार्ग, अग्निशमन वाहनों की पहुँच, फायर फाइटिंग सिस्टम, जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल निकासी तथा विद्युत अवसंरचना संबंधी सभी वैधानिक शर्तों का पालन किया गया है या नहीं।
9- मुख्य अग्निशमन अधिकारी द्वारा जारी अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (Fire NOC), स्वीकृत फायर सेफ्टी योजना, निरीक्षण रिपोर्ट, परीक्षण आख्या तथा अनुपालन प्रतिवेदन की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि इनमें कोई कमी अथवा नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।
10-. यदि जांच में यह पाया जाए कि परियोजना को किसी तथ्य के छिपाए जाने, भ्रामक जानकारी अथवा निर्धारित मानकों के विपरीत स्वीकृति प्राप्त हुई है, तो संबंधित स्वीकृतियों की वैधानिक समीक्षा कर उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
11- जांच पूर्ण होने तक जनहित एवं सार्वजनिक सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने तथा आवश्यक होने पर स्थल को सील करने की कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में यें भी मांग की है कि—
उक्त परियोजना से संबंधित समस्त वैधानिक स्वीकृतियों, भवन मानचित्र, अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOCs), पर्यावरणीय एवं अन्य आवश्यक अनुमोदनों की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच पूर्ण होने तक निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
यदि जांच में निर्माण उत्तराखण्ड के प्रचलित भवन उपविधियों, एमडीडीए के नियमों अथवा अन्य लागू विधिक प्रावधानों के विपरीत पाया जाए तो नियमानुसार भवन को सील कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा जहाँml विधिसम्मत हो, ध्वस्तीकरण सहित अन्य कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
1-परियोजना का स्वतंत्र भू-तकनीकी (Geotechnical), संरचनात्मक (Structural) एवं सुरक्षा (Safety) परीक्षण सक्षम विशेषज्ञ संस्था से कराया जाए।
2-स्थानीय निवासियों की आपत्तियों पर विधिसम्मत सुनवाई कर जनहित एवं सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाए।
यदि इस संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो स्थानीय निवासी जनहित एवं अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु सक्षम न्यायालय अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण के समक्ष उपलब्ध विधिक उपाय अपनाने के लिए विवश होंगे।