ऊॅं कल्याणम ने आयोजित किया “यंग तपस्वी” कार्यक्रम

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देहरादून । मिसरा पट्टी ऊॅ कल्याणम वेलनेस सेंटर देहरादून में यंग तपस्वी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बच्चों और युवाओं के समग्र कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायक और दूरदर्शी पहल रही। वर्तमान समय अभूतपूर्व परिवर्तन का दौर है। तकनीकी क्रांति, डिजिटल जीवनशैली और तीव्र प्रतिस्पर्धा ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं नई पीढ़ी विशेषकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिरता, सामाजिक व्यवहार और आंतरिक संतुलन के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। आज का बच्चा ज्ञान तो अर्जित कर रहा है, लेकिन जीवन को समझने की कला, आत्मसंवाद, संवेदनशीलता, अनुशासन और आत्मिक चेतना जैसे मूल तत्व धीरे-धीरे कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में केवल औपचारिक शिक्षा पर्याप्त नहीं, बल्कि आवश्यकता एक ऐसे समग्र दृष्टिकोण की है जो बाल मन, शरीर, व्यवहार और चेतन चारों स्तरों पर विकास सुनिश्चित करे।
इसी व्यापक चिंतन और मानव कल्याण की भावना के साथ ऊॅं कल्याणम द्वारा संचालित “यंग तपस्वी” कार्यक्रम आज बच्चों और युवाओं के होलिस्टिक वेलनेस अर्थात समग्र कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायक और दूरदर्शी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है। यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आंतरिक ऊर्जा जागरण और संतुलित जीवनशैली विकसित करने की एक जीवन यात्रा है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सचिन त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को ऐसे आयोजनों की सबसे अधिक आवश्यकता है, जो बच्चों को केवल अकादमिक रूप से सक्षम न बनाएं, बल्कि उन्हें जीवन के हर आयाम में संतुलित और सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा कि यंग तपस्वी का उद्देश्य बच्चों के भीतर सोशल स्किल, फिजिकल फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन, नेतृत्व क्षमता और आध्यात्मिक चेतना का विकास करना है। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था बच्चों को जानकारी तो दे रही है, लेकिन जीवन जीने की कला, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, संवाद क्षमता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति जैसे विषयों पर गंभीर प्रयास कम दिखाई देते हैं। ऐसे में ऊॅं कल्याणम का प्रयास है कि नई पीढ़ी को जीवन के वास्तविक मूल्यों, संतुलित सोच और स्वस्थ जीवन पद्धति से जोड़ा जाए। वहीं राहुल सिंह पंवार ने बताया कि यंग तपस्वी अब एक राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इस विशेष कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों से बच्चे शामिल हुए हैं, जबकि उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों से अनुभवी ट्रेनर्स पहुंचे हैं। यह इस बात का संकेत है कि आज देशभर में अभिभावक और युवा ऐसी पहल की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, जो बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर जीवन के व्यापक आयामों से जोड़ सके।

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