20 जून को माणा पास चैलेंज-एक्सट्रीम हाई एल्टीट्यूड रन का आयोजन

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रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 15 जून……

 

 

 देहरादून । सारमंग सोसाइटी ने आधिकारिक रूप से माना पास चैलेंज 2026 के विस्तारित रेस फॉर्मेट की घोषणा की है। यह हाई-एल्टीट्यूड हिमालयन रोड एंड्योरेंस पहल का फाउंडिंग एडिशन है, जिसे उत्तराखंड के माणा-बद्रीनाथ क्षेत्र में “समिट ऑर सरेंडर” हिमालयन रेस सीरीज के तहत प्रस्तावित किया गया है। माणा पास चैलेंज भारत के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण हिमालयी सड़क मार्गों में से एक पर प्रस्तावित है। माणा पास रोड उत्तराखंड की सबसे ऊँचाई पर स्थित सड़क, भारत की तीसरी सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़क और दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित सड़कों में से एक मानी जाती है, जो समुद्र तल से लगभग 5,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह एवरेस्ट बेस कैंप से भी अधिक ऊंचाई स्थित है। 20 जून को आयोजित होने वाला माना पास चैलेंज एक नियंत्रित हाई-एल्टीट्यूड रोड एंड्योरेंस इवेंट के रूप में डिजाइन किया गया है। यह इवेंट समुद्र तल से लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई के नजदीक वाले क्षेत्र में संचालित होगा, जिससे यह भारत की दुर्लभ एक्स्ट्रीम-एल्टीट्यूड रोड रेसिंग पहलों में शामिल होता है। आयोजकों के अनुसार, 50 किलोमीटर और 25 किलोमीटर रेस माना पास क्षेत्र से शुरू होंगी, जबकि 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर कैटेगरी माना गांव से शुरू होकर वहीं समाप्त होंगी। इस तरह अलग-अलग एल्टीट्यूड जोन में प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग एंड्योरेंस अनुभव तैयार किए जाएंगे। इस विस्तार का उद्देश्य एक संरचित हाई-एल्टीट्यूड एंड्योरेंस प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जिसमें अनुभवी अल्ट्रा-डिस्टेंस रनर्स के साथ-साथ वे प्रतिभागी भी शामिल हो सकें जो नियंत्रित पर्वतीय परिस्थितियों में हिमालयन रोड रेसिंग का अनुभव लेना चाहते हैं। इस इवेंट का आयोजन सारमंग सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है। यही संस्था समिट ऑर सरेंडर हिमालयन रेस सीरीज के तहत लगभग 5,799 मीटर की ऊंचाई पर आयोजित लद्दाख उमलिंगला चैलेंज के पीछे भी रही है। आयोजन टीम ने कहा कि माना पास चैलेंज को एक लंबे समय तक चलने वाले हिमालयन एंड्योरेंस प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इसका फोकस संरचित हाई-एल्टीट्यूड भागीदारी, पर्वतीय तैयारी और कठिन वातावरण में जिम्मेदार आयोजन पर रहेगा। “माना पास चैलेंज केवल एक रोड रेस नहीं है। यह एक हिमालयन एंड्योरेंस पहल है, जिसे एल्टीट्यूड अवेयरनेस, अनुशासित तैयारी, एक्लाइमेटाइजेशन, ऑपरेशनल रिस्पॉन्सिबिलिटी और पर्वतीय परिस्थितियों के सम्मान को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इतनी ऊंचाई पर अंततः पर्वत ही परिस्थितियों, समय और दृष्टिकोण को तय करता है।” आयोजकों ने हाल ही में क्षेत्र में ऑपरेशनल असेसमेंट और मौजूदा बर्फ की स्थिति को देखते हुए इवेंट शेड्यूल को संशोधित कर 20 जून कर दिया है।

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