चारधाम यात्रा में दिख रही स्वच्छता की मिसाल, श्रद्धालु निभा रहे पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

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देहरादून । देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को एक माह पूर्ण हो चुका है। इस दौरान देश-विदेश से पहुंचे 22 लाख श्रद्धालुओंने बाबा केदारनाथ, भगवान बदरीविशाल, मां गंगोत्री एवं मां यमुनोत्री के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं, यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विशेष जागरूकता भी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्वच्छता आह्वान का सकारात्मक प्रभाव चारधाम यात्रा मार्गों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप से लेकर विभिन्न धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालु स्वयं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रख रहे हैं। यात्री प्लास्टिक एवं कूड़ा इधर-उधर न फेंकने का संकल्प लेते हुए अन्य लोगों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि चारधाम केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर भी हैं। ऐसे में प्रत्येक यात्री का दायित्व है कि वह यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे। यात्रियों ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में यात्रा करना आध्यात्मिक अनुशासन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि सभी यात्री अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें तो चारधाम यात्रा और अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित तथा पर्यावरण अनुकूल बन सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में प्रशासन द्वारा यात्रा मार्गों पर लगातार स्वच्छता अभियान एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर लगाए गए संदेश बोर्ड एवं जागरूकता अभियान यात्रियों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की यह सकारात्मक भागीदारी न केवल स्वच्छ भारत अभियान को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि देवभूमि की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखने का संदेश भी दे रही है।

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