राज्य की कृषि आधारित आर्थिकी के लिए नवाचार शुरू

देहरादून।अंतर्राष्ट्रीय क्लाइमेट एक्शन लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने उत्तराखण्ड राज्य के आर्थिक विकास के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि नवाचारों को जरूरी बताते हुए ऐसी फसलों के उत्पादन को जरूरी बताया जिन्हें वन्य जीव क्षति ग्रस्त नहीं करते।उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के किसानों को फसलों के नुकसान के लिए वन्यजीवों को जिम्मेदार ठहराने मात्र से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा न केवल किसानों को बल्कि नीतिकारों को ऐसी फसलों के उत्पादन का मसौदा तैयार करना होगा जिन्हें वन्य जीव क्षति ग्रस्त नहीं करते।उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिकी के विकास में लीक से हटकर कार्य करने और नवाचारों को प्रोत्साहित करने की प्रबल आवश्यकता है।इसी क्रम में उन्होंने गोविन्द वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में एक कृषि वैज्ञानिक दल ने डॉ जुगलान के साथ हिल एग्रीकल्चर पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत की। जीबी पन्त एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कृषि अनुसंधान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ ललित भट्ट ने बताया कि बीते वर्ष दिसंबर माह विश्वविद्यालय में डॉ जुगलान ने विश्वविद्यालय में आयोजित अन्वेषण 2025 में बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत करते हुए शोध छात्र छात्राओं को हिल एग्रीकल्चर में शोध करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ऐसे नवाचारों प्रमोट करने की बात कही थी जो राज्य की आर्थिकी का एक मजबूत आधार बन सकें। शुक्रवार को पहाड़ी राज्य नागालैण्ड की एक खास किस्म की मिर्च की खेती को उत्तराखण्ड में विकसित करने के लिए बीजों के आदान प्रदान करते हुए कृषि अनुसंधान विभाग के विशेषज्ञों के दिशा निर्देशन में बीज बोने का कार्य किया गया।जिसकी समय समय पर तकनीकी रूप से देखभाल की जाएगी और किसानों के लिए उन्नत बीज तैयार किया जाएगा। डॉ जुगलान ने बताया कि इस खेती की खास बात यह है कि इसे वन्यजीव हों या कृषि कीट कोई भी क्षति ग्रस्त नहीं करता जिसका प्रमुख कारण इसका तीखापन है।इसका तीखेपन को गिनीज़ बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।इसकी भारत एवं विदेशों में अत्यधिक मांग है।साधारण मिर्च की अपेक्षा इसका तीखापन कई गुना अधिक होता है।राज्य में कृषि आधारित आर्थिकी विकास का यह अनूठा नवाचार पर्यावरण एवं कृषि विशेषज्ञों के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। संयुक्त दल में कृषि अनुसंधान विभाग के कृषि वैज्ञानिक डॉ एसो प्रोफेसर डॉ ललित भट्ट, डॉ उपेन्द्र कुमार सिंह, पर्यावरण प्रेमी अखिल भंडारी एवं अनुसंधान विभाग के क्रमिक उपस्थित रहे। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने जीबी पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ)शिवेन्द्र कुमार कश्यप का आभार प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे नवाचारों से राज्य के आर्थिक विकास को दिशा मिलेगी वहीं दूसरी ओर यह प्रयोग रिवर्स माइग्रेशन को मजबूती प्रदान करने में सहायक होंगे।