याद करके आज भी छलक जाते हैं आंसू ! मुजफ्फर नगर कांड , पुलिस बर्बरता का काला सच…….

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दिल्ली। उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति व श्रद्धांजली सभा के आयोजक देव सिंह रावत ने कहा कि पिछले 32 वर्ष से 2 अक्टूबर को उत्तराखण्डी दिल्ली के राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर काला दिवस मनाते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष दिल्ली पुलिस द्वारा धरने की अनुमति न दिया जाना लोकतंत्र पर हमला है जिसकी उत्तराखण्ड समाज कड़ी भर्त्सना करता है। जंतर मंतर पर अनुमति न दिए जाने पर मुजफ्फरनगर काण्ड-94 की 32वीं बरसी पर दिल्ली में संसद की देहरी पर स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया के सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय सह-संयोजक व उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति के महामंत्री रहे वरिष्ठ आंदोलनकारी जगदीश ममगांई ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के खुशहाल बिष्ट, उत्तराखण्ड महासभा के हरिपाल रावत व अनिल पंत, जनमोर्चा के बृजमोहन सेमवाल व उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के शिव प्रसाद बलूणी , भाजपा नेता विजय सती, डा. हरपाल नेगी, पत्रकार व वरिष्ठ आंदोलनकारी सुरेश नौटियाल व पत्रकार कुशाल जीना आदि ने श्रद्धांजली सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर मृत आत्माओं के लिए मौन रखा गया, न्याय प्रदान करवाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
राष्ट्रीय विचारक वरिष्ठ आंदोलनकारी जगदीश ममगांई ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि सीबीआई, महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिन अधिकारियों को दोषी माना, उन अपराधियों को देश का न्याय दण्डित करने में अक्षम रहा। JUSTICE DENIED! तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह जिसने उत्तराखण्डी आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया, ‘खेत में अकेली महिला को पाकर कोई पुलिस वाला बलात्कार नहीं करेगा तो क्या करेगा’? जैसी निर्लज्ज टिप्पणी की, उप महानिरीक्षक बुआ सिंह सहित अन्य अधिकारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने न केवल मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार किया बल्कि संरक्षण देते हुए पद्दोन्नति दे कर पुरस्कृत किया।
ममगांई ने कहा कि उत्तराखण्डी आंदोलनकारियों की हत्या, महिलाओं के साथ दुष्कर्म के दोषियों तथा कार सेवकों के हत्या के कुकृत्यों के एक संरक्षक मुलायम सिंह यादव को असाधारण कार्य करने के लिए दिए जाने वाले भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। तत्कालीन मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया, सेवानिवृत्ति के बाद नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी का अध्यक्ष नियुक्त किया। फरवरी 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष, राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया। हाल में चंदा चोरी, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे संघ प्रचारक चंपत राय ने मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा की मनमानी का उल्लेख किया जिसमें धांधली, भ्रष्टाचार की चर्चा है। नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा को नई भाजपा ने लोकसभा चुनाव लड़वाया लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता ने कारसेवकों की हत्या, उत्तराखण्डी महिलाओं के साथ दुष्कर्म को याद रखा, हरा दिया।
संयोजक देव सिंह रावत ने कहा कि वर्ष 1994 से अब तक की उप्र व केन्द्र सरकारों सहित सभी राजनैतिक दलों की इस प्रकरण के दोषियों को सजा न दिलाने के नीति रही है। यही कारण है कि 1984 सिक्ख दंगे, गोधरा कांड आदि के लिए कई जांच आयोग बने, सजा हुई लेकिन मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा, मसूरी, खटीमा, श्रीयंत्र टापू आदि काण्डों पर किसी भी सरकार ने जांच आयोग नहीं बिठाया। आंदोलनकारियों ने स्वामी, कोश्यारी, तिवारी, खण्डूडी, निशंक, बहुगुणा, तीनों रावतों व धामी को भी उत्तराखण्डियों से किये गये इस विश्वासघात के लिए धिक्कारा।

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