युवाओं के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए संस्कारपरक शिक्षा महत्वपूर्ण
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जौली ग्रांट,देहरादून। शिक्षा में संस्कार होना आवश्यक है। संस्कार विहीन शिक्षा विद्यार्थियों को उन्मादी बनाती है।युवाओं के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए संस्कारपरक शिक्षा महत्वपूर्ण है।स्वस्थ को स्वस्थ रखना और रोगी को निरोग करने के लिए प्रकृति सम्मत आहार शैली को अपनाना होगा।यह बात स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षारंभ समारोह 2026-27 को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखंड प्रांत के पर्यावरण संयोजक पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने कही।वह फार्मेसी विज्ञान के छात्र छात्राओं को प्रकृति,संस्कृति और चिकित्सा विज्ञान विषय पर बोल रहे थे।उन्होंने कहा शिक्षा का पहला गुण विनम्रता प्रदान करना है।यहीं से हमारे शैक्षणिक व्यक्तित्व का विकास प्रारंभ होता है।कार्यक्रम में फार्मेसी उद्यमिता की जानकारी देते हुए विषय विशेषज्ञ अमित कोटियाल ने कहा कि यदि आपने फार्मेसी विज्ञान का गहन अध्ययन करते हुए अपने विषय पर महारथ हासिल है तो आप एक सफल उद्यमी बन सकते हैं।उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए शैक्षणिक ही नहीं व्यवहारिक ज्ञान भी आवश्यक है। विश्व विद्यालय की अधिष्ठाता डॉ प्रीति कोठियाल ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मति किया।मौके पर डॉ गणेश, डॉ अरविन्द फर्स्वाण, डॉ सृष्टि और डॉ प्रियंक पुरोहित प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन डॉ सृष्टि ने किया।