बढ़ती गर्मी के साथ विकराल रूप धारण करने लगी जंगलों की आग

पिथौरागढ़ । गर्मियां बढ़ते ही प्रदेश के जंगलों में आग लगने का सिलसिला लगातार बढ रहा है। वनों की आग की  तेजी से आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। जिससे आसपास के लोगों में दहशत देखने को मिल रही है। इतना ही नही अस्कोट का कस्तूरी मृग अभयारण्य भी वनाग्नि की चपेट में है। जिससे वन्यजीव संसार के जीवन  पर भी संकट गहराने लगा है।
गर्मियां शुरू होते ही पिथौरागढ़ समेत जिले के अधिकांश जंगलों में आग लगने की घटनाओं मैं तेजी से बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। बेरीनाग, गंगोलीहाट, गणाई, थल, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला सहित बागेश्वर जनपद के धरमघर, कपकोट, कांडा और गरुड़ क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों भीषण आग लगी है। इससे अमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो रही है। वहीं दूसरी ओर वायुमंडल और इंसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जंगलों की लगी आग का धुआ नगरों तक फैल चुका है।
वन क्षेत्र के तहत आने वाला अस्कोट कस्तूरी मृग अभयारण्य पिछले 10 दिनों से जल रहा है। अभयारण्य में भीषण आग लगने से क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ कस्तूरा मृग के जीवन पर खतरा मंडरा गया है। अभयारण्य से पिछले 10 दिनों से लगातार धुआं उठ रहा है। वनाग्नि ने अभयारण्य के बड़े दायरे को अपनी चपेट में लिया है। हजारों हेक्टेयर में फैले इस जंगल में कस्तूरी मृग के अलावा भालू, तेंदुआ, हिरन आदि दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी है। वनाग्नि से इन वन्यजीवों के जीवन पर भी संकट आ गया है। वहीं बहुमूल्य वन संपदा को भी आग से खासा नुकसान पहुंच रहा है। यदि क्षेत्र के जंगलों में लगी आग से वन्यजीव आबादी इलाके में पहुंचे तो इससे मानव जीवन को भी खतरा हो सकता है। अभयारण्य क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाएं पूर्व में भी सामने आ चुकी हैं। कस्तूरी मृग सहित अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के शिकार के लिए शिकारी यहां के जंगलों में आग लगाते हैं। इसमें सबसे बड़ी हैरानी है कि अब तक न तो कोई शिकारी और ना ही आग लगाने वाला वन विभाग की पकड़ में आ सका है। ऐसे में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठ रहे है।

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