दून विश्वविद्यालय में विश्व रंगमंच दिवस पर पांच दिवसीय नाट्य समारोह का आयोजन

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देहरादून । दून विश्वविद्यालय के रंगमंच एवं लोक प्रदर्शन कला विभाग तथा दून घाटी रंगमंच, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर 27 से 31 मार्च तक पाँच दिवसीय नाट्य समारोह का सफल आयोजन किया गया। इस नाट्य श्रृंखला में विभिन्न प्रतिष्ठित नाट्य संस्थाओं एवं कलाकारों द्वारा उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने भरपूर सराहना दी। समारोह का शुभारंभ प्रथम दिवस पर प्रख्यात नाटककार गिरीश कर्नाड द्वारा लिखित नाटक ‘तुगलक’ के मंचन से हुआ, जिसका निर्देशन बृजेश नारायण ने किया। लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति ने अपने प्रभावशाली संवाद, सशक्त अभिनय और सटीक निर्देशन से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
द्वितीय दिवस पर कला मंच द्वारा बादल सरकार लिखित नाटक ‘पगला घोड़ा’ का मंचन मिताली पुनेठा के निर्देशन में किया गया। यह नाटक मानव मन के भीतर छिपे अधूरे प्रेम, भय और जीवन के कठिन निर्णयों को मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है, जिसने दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। तृतीय दिवस पर बादल सरकार के चर्चित नाटक ‘बाकी इतिहास’ का मंचन वरिष्ठ रंगकर्मी बृजेश नारायण के निर्देशन में हुआ। नाटक ने मानव मन के अपराधबोध और अस्तित्व से जुड़े प्रश्नों को गहराई से प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को भावविभोर कर दिया। चतुर्थ दिवस पर दून विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा हरिशंकर परसाई लिखित ‘राजपुर रोड का रोमियो’ का मंचन डॉ. कैलाश कंडवाल त्रके निर्देशन में किया गया। यह नाटक समाज के ढोंग और तथाकथित ठेकेदारों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करता है, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। समारोह के अंतिम दिवस पर ‘सावित्रीबाई फुले’ नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसका निर्देशन डॉ. अजीत पंवार द्वारा किया गया। यह प्रस्तुति भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के संघर्ष, साहस और शिक्षा के प्रति उनके अदम्य संकल्प को जीवंत करती है। नाटक के भावनात्मक दृश्यों, विशेषकर सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले के मध्य पत्रों के आदान-प्रदान ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, दुर्गेश डिमरी, प्रो. एच. सी. पुरोहित, प्रो. हर्ष डोभाल, प्रो. आर.पी. ममगाईं,  डॉ. कैलाश कंडवाल, श्रीश डोभाल, डॉ. चेतना पोखरियाल सहित अन्य शिक्षकों एवं कर्मचारियों उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अजीत पंवार, डॉ. कैलाश कंडवाल एवं बृजेश नारायण का विशेष योगदान रहा। समारोह के समापन अवसर पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने इस सफल आयोजन के लिए सभी कलाकारों, आयोजकों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को निरंतर सशक्त करते हैं।

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