संस्कार परक शिक्षा के लिए शिक्षकों को संयमित आचरण जरूरी – डॉ जगराम

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जौली ग्रांट, देहरादून । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के उत्तर पश्चिम क्षेत्र संयोजक डॉ जगराम ने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को संस्कार परक शिक्षा प्रदान करना शिक्षकों का नैतिक कर्तव्य है,लेकिन उनके व्यक्तित्व में शिक्षा के साथ संस्कार पोषण तभी होगा जब शिक्षक अपने दैनिक जीवन में संयमित आचरण अपनाएंगे।उन्होंने कहा व्यवस्थाएं हमें शिक्षण का प्रशिक्षण देती हैं।जबकि शिक्षक शिक्षा के साथ साथ संस्कार पोषण भी देता है।प्रत्येक शिक्षक को अपना वर्षभर का दैनिक कलेंडर तैयार करना चाहिए,साथ हो त्रैमासिक रूप से उक्त शिक्षण कार्य की स्वयं समीक्षा भी की जानी चाहिए कि हम अपने शिक्षण कार्य में कितने सफल हो रहे हैं।वह स्वामी राम विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग विद्यालय गोष्ठी सभागार में आयोजित शिक्षाविदों को शिक्षक के उद्देश्य विषय पर चर्चा कर रहे थे।न्यास के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते स्वामीराम स्कूल ऑफ यौगिक साइंस के प्रोफेसर डॉ रुद्र भंडारी ने कहा कि न्यास के कार्यों से शिक्षक समाज को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करने का अभिनव प्रयास किया जा रहा है उससे निश्चित ही युवा पीढ़ी सहित समाज को नई दिशा मिलेगी। न्यास के उत्तराखण्ड प्रान्त पर्यावरण संयोजक पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने कहा कि संस्कृति और प्रकृति पर आधारित शिक्षा से ही राष्ट्र का विकास संभव है।उन्होंने कहा कि हम जैसा व्यवहार घर, परिवार या विद्यालय में करते हैं,उसी व्यवहार का अनुसरण हमारी नई पीढ़ी भी करती है इसलिए युवा पीढ़ी में किसी भी परिवर्तन से पहले हमें खुद के व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। स्वामी राम विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विद्यालय गोष्ठी सभागार में आयोजित इस परिचर्चा में शिक्षाविदों के साथ पर्यावरणविद एवं योगाचार्य, आयुर्वेदाचार्य एवं प्राचार्य उपस्थित रहे।योग विद्यालय के आचार्य डॉ सुबोध सौरभ सिंह ने कार्यक्रम में देहरादून और हरिद्वार जनपद से आए हुए सभी विद्वतजनों का आभार प्रकट किया।दो सत्रों में आयोजित इस परिचर्चा में युवा पीढ़ी को शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में डॉ बृजलता चौहान, तनुजा पोखरियाल, डॉ माला त्रिपाठी,डॉ नवीन चंद्र पन्त, डॉ चंद्र प्रकाश पाण्डेय, डॉ शिव ओम, डॉ अंकित शर्मा, डॉ अनुज कुमार,राकेश कुमार, डॉ रुद्र भंडारी,डॉ सुबोध सिंह ने अपने विचार रखे।