पर्यावरणविद संजय राणा डॉक्टरेट से मानद उपाधि से सम्मानित…..
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नयी दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए एनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के निदेशक तथा बड़ौत निवासी पर्यावरणविद *संजय राणा को सोकरेट्स सोशल रिसर्च यूनिवर्सिटी ट्रस्ट द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।*
यह सम्मान समारोह विश्व युवा केंद्र, तीन मूर्ति भवन के निकट, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रख्यात चिंतक एवं राजनेता करण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आई एफ एस श्रीमती अंजू रंजन, पद्मश्री श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ. नमिता जैन, श्री राजकुमार एवं श्री देशवीर नैन की विशेष रूप से उल्लेखनीय उपस्थिति में श्री संजय राणा को यह सम्मान प्रदान किया।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और पर्यावरण प्रेमियों की उपस्थिति में संजय राणा के कार्यों की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर समाज को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है और इस दिशा में संजय राणा का योगदान प्रेरणादायी है।
संजय राणा पिछले लगभग 17 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में एस्रो संस्था द्वारा युवाओं और विद्यार्थियों के बीच “आओ नदी को जानें”, जलवायु परिवर्तन, जल-जंगल-जमीन संरक्षण, सघन वन, स्वच्छता और पर्यावरणीय व्यवहार परिवर्तन जैसे विषयों पर निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा चुका है।
उनकी इसी निरंतर सामाजिक प्रतिबद्धता और प्रभावी कार्यों के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इनमें भारत सरकार द्वारा प्रायोजित जल प्रहरी सम्मान, जे.पी. इंटरनेशनल अवॉर्ड, जल योद्धा सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।
संजय राणा ने इस अवसर पर कहा कि यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण और समाज में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युवाओं को प्रकृति से जोड़ने और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा। यह सम्मान उन सभी युवाओं, अध्यापकों एवं विद्यालय परिवारों को समर्पित है जिन्होंने इस पूरी यात्रा के दौरान कंधे से कंधा मिलाकर मेरे साथ चले है और स्वच्छ पर्यावरण की अवधारणा को जीवित बनाए हुए हैं।