पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए वर्चुअल के जरिये शिक्षाविदों के साथ किया वैचारिक….. मंथन
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देहरादून। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखंड प्रांत के पर्यावरण संयोजक पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए आभासीय माध्यम से शिक्षाविदों के साथ वर्चुअल बैठक की। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुःख के साथ अपने को समान भाव से रहना ही जीवन जीने की कला है। हमें प्रकृति आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर देना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति और संस्कृति सहित जल संरक्षण को महत्व दिया गया था।जिसे हम आधुनिकता और भौतिकतावाद के प्रभाव में आकर भूलते चले गए।परिणाम हम सबके सामने हैं । जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है।इसके निवारण के लिए व्यक्तिवादी सोच से ऊपर उठकर सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे। डॉ जुगलान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण ही काफी नहीं है बल्कि हर स्तर पर पानी और पर्यावरण बचाओ प्लास्टिक हटाओ को अपने व्यवहार में लाना होगा।उन्होंने कहा कि इस महान कार्य में उत्तराखंड की महिलाओं और युवाओं का योगदान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।बैठक की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ संगीता जादौन ने कहा कि माताएं बच्चों की प्रथम शिक्षिका होती हैं।बच्चों में प्रकृति के प्रति संस्कार पोषण करना हर मातृ शक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।यह जिम्मेदारी समय के साथ और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम शिक्षण या अध्यापन के क्षेत्र में कार्य कर रहे होते हैं।इस अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्व विद्यालय के भौतिक विज्ञानी एवं न्यास के प्रांत संयोजक डॉ कमल देव लाल ने सभी शिक्षाविदों का आभार जताते हुए पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सहयोग करने की आशा जताई।बैठक में जीबी पन्त यूनिवर्सिटी के कृषि व्यवसायिक प्रबंधन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉक्टर आर एस जादौन सहित युवा भूगोलवेत्ता डॉ राहुल शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर विद्यालय संचालिका शिक्षिका प्रतिभा सरण, शिक्षक अशोक कुमार, देवेंद्र शुक्ला,गुंजन, अरुणा मल्ल, सुरुचि शर्मा ने बैठक में प्रतिभाग किया। डॉ जुगलान ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर शीघ्र ही एक सक्रिय टीम का गठन प्रदेश स्तर पर किया जाएगा।जो सरकार को पर्यावरण संरक्षण और नीति निर्धारण में सहयोग करेगी।