तीर्थाटन के नाम पर उत्तराखण्ड आने वाले लोगो को पर्यावरण के प्रति होना होगा समर्पित…

देहरादून। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखंड द्वारा विभिन्न विषयों पर आधारित विषय विशेषज्ञों की अध्यक्षता में सात दिवसीय आभासीय व्याख्यानमाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण विषय पर अपने उद्बोधन में मुख्य वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए अंतर्राष्ट्रीय जलवायु कार्यवाही नेतृत्वकारी सम्मान से सम्मानित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखंड प्रांत के पर्यावरण संयोजक पर्यावरणविद डॉ विनोद प्रसाद जुगलान ने कहा कि उत्तराखण्ड के मध्य हिमालयी क्षेत्र में जिस तरह से जलवायु परिवर्तन से जनजीवन प्रभावित हो रहा है इसके लिए सिर्फ प्रकृति नहीं मानव जिम्मेदार है। हर वर्ष चार करोड़ से अधिक यात्री पर्यटन और तीर्थाटन के नाम पर उत्तराखण्ड आते हैं जो लगभग 20 करोड़ से अधिक पानी और कोल्ड ड्रिंक के रूप में प्रयोग की गई प्लास्टिक की बोतलें यहां फेंक जाते हैं। जबकि भारी संख्या में वाहनों से यात्रा करने वाले वाहनों से प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे हिमालय का पारिस्थितिकीय तंत्र प्रभावित हो रहा है। विकास के नाम पर लाखों की संख्या में पेड़ो के कटान से पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। इसके लिए हमें मिलजुलकर प्रयास करने होंगे। पहाड़ में विकास की नीतियां पहाड़ के अनुरूप बनाईं जानी चाहिए। शोध कर्ता छात्र छात्राओं को प्रकृति आधारित शोध कार्यों को महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा का प्रसार तो हुआ लेकिन परम्परागत ज्ञान को हम संरक्षित करने में असफल रहे है जिसका परिणाम है कि आज आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। नदियों के मार्ग अवरुद्ध होने से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। नदियों की अविरलता के लिए सरकार को नीति निर्धारण करना होगा।इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वनस्पति विज्ञान की विशेषज्ञ शिक्षाविद ललिथा कृष्ण स्वामी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का कार्य कठिन तो लगता है लेकिन असम्भव बिल्कुल नहीं है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जनजागृति के लिए जन जागरूकता लानी होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक व्याख्यान मालाओं के आयोजन से शिक्षणेत्तर कार्यों को न केवल गति मिलेगी बल्कि पूरे राज्य भर में पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को दिशा मिलेगी। न्यास के उत्तराखण्ड प्रान्त अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ अशोक मेंदोला ने बताया कि सात दिवसीय व्याख्यान माला में पर्यावरण संरक्षण के अतिरिक्त उच्च शिक्षा में चरित्र निर्माण, वैदिक गणित,तकनीकी शिक्षा, आत्म निर्भर भारत की आधार शिला,, जलवायु परिवर्तन और प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान प्रसारित किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन लेफ्टिनेंट डॉ बृजलता चौहान एवं डॉ राकेश पन्त द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।इस अवसर पर गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एग्री बिजनेश मैनेजमेंट कॉलेज के डीन डॉ आर एस जादौन, न्यास के प्रान्त संयोजक डॉ कमल देव लाल,डॉ मुकेश कुमार, डॉ आशुतोष भट्ट, डॉ पंकज कुमार, डॉ एस के श्रीवास्तव, डॉ दीप शिखा,डॉ नीना लहरी, रेखा सजवान,शशि राणा,मीनू सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षा विद और शोध कर्ता जुड़े रहे। व्याख्यान मालाओ के आयोजन से विभिन्न विषयों पर आधारित शिक्षा का प्रसार किए जाने का नवाचार किया जा रहा है।

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