मुंबई में उत्तराखंडी प्रवासी पंचायत……
1 min readमुंबई । मुंबई के प्रबुद्ध उत्तराखंडी प्रवासियों ने एक पंचायत का आयोजन किया। इस अवसर पर डा. धन सिंह रावत, मंत्री, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा डॉ. राजेश्वर उनियाल, साहित्यकार ने इस पंचायत का संचालन किया।
इस पंचायत में उपस्थित प्रतिनिधियों ने उत्तराखंडी प्रवासियों की समस्याओं और उनके सुझावों आदि पर विस्तृत चर्चा की। इस पंचायत में मुख्य रूप से भारत विकास परिषद के पश्चिमी क्षेत्र के संयुक्त महासचिव श्री महेश शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुंबई संपर्क प्रमुख श्री रमेश रयाल शर्मा, भारतीय जनता पार्टी मुंबई के उत्तराखंड प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री महेंद्र सिंह गोसाईं, वरिष्ठ अधिवक्ता, लेखिका एवं नाट्य निर्माता सुश्री ममता भट्ट, गढ़वाल भ्रातृ मंडल के अध्यक्ष श्री रमणमोहन कुकरेती, हिमालय पर्वतीय संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री चामू सिंह राणा, पत्रकार एवं कौथिग के संस्थापक श्री केशर सिंह बिष्ट, सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य श्री राजेंद्र रावत, भाजपा के युवा नेता श्री मनोज भट्ट, श्री एल. एन. बहुगुणा, श्री बुद्धि प्रसाद देवली, श्रीमती विजया पंत तुली, श्रीमती शशि नेगी,श्री वीरेन्द्र गुसाईं, श्री वी. के. सावंत, श्री राकेश खंकरियाल, श्री सुरेंद्र सिंह भंडारी, श्री धीरज रावत, श्री राजेन्द्र शर्मा, श्री कीर्ती नेगी, श्री विशाल नैथानी व कमल जी उनियाल सहित कई वरिष्ठ जनों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।
उपस्थित प्रतिनिधियों ने मुख्य रूप से उत्तराखंड की शिक्षा जगत व स्वास्थ्य की समस्याओं पर चिंता व्यक्त की । इसी के साथ उपस्थित सभी प्रबुद्धजनों का यह भी मानना था कि मुंबई में लगभग 90% उत्तराखंडी आज राष्ट्रवादी विचारधारा वाले और पूरी तरह से भाजपा से जुड़े होने के बाद भी मुंबई महानगरपालिका के वर्तमान चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड के किसी भी व्यक्ति को नगर सेवक का टिकट तक नहीं दिया। इसी के साथ उत्तराखंड में गुलदार, भालू व बंदरों के कारण गांवों में लोगों का खेती के प्रति आकर्षण कम हो रहा है तथा इससे भी पलायन बढ़ रहा है।
प्रवासी पंचायत के संयोजक डॉ. राजेश्वर उनियाल ने माननीय मंत्री जी के सम्मुख मुंबई में उत्तराखंड की लगभग 100 वर्ष की यात्रा का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं की ओर उत्तराखंड सरकार का ध्यान आकर्षित किया –
1- वर्तमान समय में उत्तराखंड की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 20 लाख है तथा लगभग 60 लाख से अधिक उत्तराखंडी प्रवासी हैं। लेकिन उत्तराखंड की सरकार में किसी भी समिति या आयोग में प्रवासियों को कहीं भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता है, जबकि एक तिहाई उत्तराखंडी प्रवासी हैं । स्वाभाविक है कि सरकार एवं विभिन्न पार्टियों के संगठनों में भी प्रवासियों को उचित सम्मान के साथ प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
2- सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित करने में प्रवासियों की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है । इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह प्रवासियों की प्रतिभाओं का उचित मूल्यांकन कर राज्य के निर्माण में उनका पूरा-पूरा सहयोग ले।
3- जब भी सरकार की कोई प्रतिनिधि मुंबई आते हैं, तो उन्हें यहां उत्तराखंडी प्रवासियों के साथ कम से कम एक वार्ता का कार्यक्रम अवश्य रखना चाहिए, ताकि प्रवासियों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाई जा सके।
4-उत्तराखंड में जंगली जानवरों के कारण जनजीवन एवं फसलों की बहुत समस्या उत्पन्न हो रही है । इसलिए उचित होगा कि उत्तराखंड के गांवों व खेतों को घेरकर सुरक्षा दीवार बनानी चाहिए । अन्यथा लोग एक तो खेती से विमुख हो रहे हैं और साथ ही धीरे-धीरे गांव को भी छोड़ रहे हैं।
5- उत्तराखंड की मूल धरोहरों का संरक्षण किया जाना चाहिए। विशेषकर प्राचीन घरों की वास्तुकला व लोक संसाधन विलुप्त होते जा रहे हैं।
6- हमारे राज्य की अभी तक कोई भाषा नीति नहीं बन पाई है
7- उत्तराखंड देवभूमि में बदल रही डेमोग्राफी पर भी ध्यान देना होगा।
सभी प्रतिनिधियों की बातों को ध्यान से सुनने के बाद डा. धन सिंह रावत, माननीय मंत्री, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड सरकार, मुख्य अतिथि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सबसे पहले तो मुंबई में प्रवासी उत्तराखंडियों का इस प्रकार से व्यवस्थित एवं गंभीरता से भरा हुआ पंचायत आयोजित करने हेतु सभी को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिए कि आज पंचायत में जो भी बातें उठाई गई हैं, वह सरकार के प्रतिनिधि होने के नाते इन सभी पर गंभीरता से विचार करेंगे और संबंधित विभागों से अपेक्षित कार्य करने हेतु भी कहा जाएगा । इसी के साथ डॉ. धन सिंह रावत जी ने उत्तराखंड की प्रगति का संक्षिप्त विवरण भी देते हुए कहा कि हम प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए पूरा कार्य कर रहे हैं। गांव में भले ही एक विद्यार्थी हो, तो उसके लिए भी हमने एक अध्यापक नियुक्त किया है। इसी तरह छोटे सा राज्य होने के बाद भी उत्तराखंड में 37 विश्वविद्यालय और 12 मेडिकल कॉलेज हैं, जहां 1650 एमबीबीएस और 750 पी.जी. स्तर की शिक्षा दी जा रही है। आज उत्तराखंड के हर विकासखंड में एक डिग्री कॉलेज है ।
आज उत्तराखंड के 15,000 न्याय पंचायतों में से 14,332 न्याय पंचायतों में सड़क पहुंच चुकी है तथा इस वर्ष दिसंबर तक 100% गांवों में जल पहुंचा दिया जाएगा। आज उत्तराखंड हर क्षेत्र में विकास चल रहा है और इसीलिए उत्तराखंड राज्य की प्रति व्यक्ति आय रु. 2,75,000/-पहुंच चुकी है।
इसी के साथ सार्थक व सुव्यवस्थित पंचायत का सफल आयोजन सभी को धन्यवाद देने के साथ समाप्त हुआ।