🕉️ दुर्लभ आद्यात्म रहस्य से जुड़ा है लाटू देवता मंदिर

चमोली। उत्तराखण्ड के चमोली जिले के वाँण गाँव में स्थापित लाटू देवता मंदिर अत्यंत रहस्यमय है।‌ मंदिर में आज भी सक्षात नागराज मणि सहित वास करते हैं और उनकी पूजा साल में एक बार ही की जाती है। विशाल देवदार वृक्ष के नीचे स्थापित यह छोटा मंदिर सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। मंदिर अपने भीतर के एक रहस्य के कारण अधिक प्रसिद्ध हैं।

दरअसल मंदिर के गर्भगृह में साल में केवल एक बार ही पूजा की जाती है और इस पूजा को करने के लिए भी मंदिर के पुजारी अपनी आँखों और मुँह पर पट्टी बंधकर गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।
लाटू देवता को उत्तराखंड की आराध्या देवी नंदा देवी का धर्म भाई माना जाता है। प्रत्येक १३ सालों में उत्तराखंड की सबसे लंबी श्री नंदा देवी की राजजात यात्रा का बारहवाँ पड़ाव वाँण गाँव है। लाटू देवता वाँण गाँव से होमकुंड तक नंदा देवी का अभिनंदन करते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर के अंदर साक्षात रूप में नागराज मणि के साथ निवास करते हैं। श्रद्धालु साक्षात नाग को देखकर डरे न इसलिए मुँह और आँख पर पट्टी बाँधी जाती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पुजारी के मुँह की गंध देवता तक ना पहुँचे इसलिए वे पूजा के दौरान मुँह पर भी एक पट्टी रखते हैं। श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह मूर्ति देखने अनुमति नहीं है और वे देवता की आराधना ७५ फिट की दूरी पर करते हैं। गौरतलब है की जिस दिन लाटू देवता मंदिर के कपाट खुलते हैं उस दिन यहाँ पर विष्णु सहस्रनाम व भगवती चंडिका का पाठ भी आयोजित किया जाता है और इस दिन महामेला भी आयोजित किया जाता है।

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